अमरनाथ गुफा के रहस्य – Amarnath Gufa Ka Rahasya
अमरनाथ गुफा के रहस्य – Amarnath Gufa Ka Rahasya
अमरनाथ गुफा, भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक मंदिरों में से एक है। यह मंदिर हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है।
अमरनाथ गुफा, भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित एक हिन्दू मंदिर है। यह अमरनाथ गुफा जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्री नगर से लगभग 141 किलोमीटर दूर और 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
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इस अमरनाथ गुफा में बर्फ के द्वारा भगवान शिव का शिवलिंग बनता है इसीलिए इनको बाबा बर्फानी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।
इस अमरनाथ गुफा से जुड़े कई ऐसे रहस्य है जिनको आज तक कोई समझ नही पाया है। तो चलिए जानते है इस पोस्ट के माध्यम से अमरनाथ गुफा का रहस्य के बारे में।
अमरनाथ गुफा के बारे में जानकारी
1.अमरनाथ गुफा की सबसे पहले खोज सोलहवीं शताब्दी में एक बूटा मलिक नामक मुस्लिम गडरिए ने कि थी। एक दिन उसको एक साधु ने कोयले से भरी हुई कांगड़ी (हाथ सेकने का पात्र) दिया था। घर जाकर गडरिए ने देखा कोयले कि जगह सोना बन गया तो वह बहुत हैरान हुआ और उसी समय उस साधु का धन्यवाद करने के लिए चल दिया लेकिन उसने देखा उस साधु की जगह एक बहुत बड़ी गुफा बन चुकी थी।
2.जब वह गड़रिया गुफा के अंदर गया तो उसने वहां पर बर्फ से बना हुआ शिवलिंग देखा। उस गडरिए ने इस बात को गांव वालों को बताया। उसके बाद यह स्थान तीर्थ स्थल बन गया। आज भी उस गडरिए के वंशज इस अमरनाथ गुफा की देखरेख करते है और चढ़ावे का एक चौथाई आज भी उस गडरिए के वंशजो को मिलता है।
3.इस अमरनाथ गुफा में बर्फ की बूंदे गिरने से शिवलिंग बनता है लेकिन बर्फ कहां से आती है इस बात का आज तक कोई पता नही लगा सका। हैरानी की बात तो ये है कि यह शिवलिंग बिल्कुल ठोस बर्फ का बना होता है जबकि उसके आस पास गिरने वाली बर्फ बिल्कुल भुरभुरी होती है।
4.इस शिवलिंग का आकार चंद्रमा के आकार के साथ घटता बढता रहता है। जब चंद्रमा का आकार बिल्कुल समाप्त हो जाता है तो इस शिवलिंग का आकार भी समाप्त हो जाता है।
5.माना जाता है कि इस अमरनाथ गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को पहली बार अपने अमर होने का रहस्य बताया था। जब भगवान शिव माता पार्वती को अमरत्व होने का ज्ञान दे रहे थे उसी वक्त वहां पर एक कबूतर का जोड़ा भी मौजूद था। जिससे वह कबूतर का जोड़ा भी कथा सुनने के बाद अमर हो गया। और बताया जाता है कि वह कबूतर का जोड़ा आज भी वहीं पर मौजूद है और जिस व्यक्ति को उनके दर्शन होते है वह व्यक्ति बहुत भागयशाली होता है और उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है।
6.जब भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाने के लिए इस गुफा में लाए तो उन्होंने काल अग्नि को आदेश दिया कि इस गुफा में जितने भी जीव है उन सब को भस्म कर दो। काल अग्नि ने आदेश पाकर सभी जीवों को भस्म कर दिया लेकिन वहां पर कबूतर के दो अंडे रह गए क्योंकि अंडो को सजीव नही माना जाता है। इसलिए वो बच गए। जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया तो उन अंडों में से कबूतर निकल आए और उन्होंने भी वो कथा सुन ली थी जिससे वो भी अमर हो गए।
7.इस अमरनाथ गुफा में जितने भी भक्त शिवलिंग के दर्शन करने आते है, वो पैदल ही चलकर आते है जिससे वह बहुत थक जाते है लेकिन जब वह इस गुफा में पहुंचते है तो उनकी सारी थकान गायब हो जाती है। इसके पीछे क्या रहस्य है उसका आज तक कोई भी पता नही लगा पाया।
8.इस गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया कि उनके गले में जो मुंड माला है वह पार्वती के ही पूर्व जन्म के है। भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया कि जब भी तुम जन्म लेती हो और मृत्यु को प्राप्त होती हो तब इस मुंड माला में एक मुंड बढ़ जाता है। और इस मुंड माला में सारे मुंड तुम्हारे ही है।
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9.भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा की ओर जाते समय पांच तत्व (जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि, आकाश) का त्याग किया था। सबसे पहले उन्होंने पहलगाम में अपने नंदी बैल का त्याग किया था। उसके बाद चंदनवाड़ी में अपनी जटाओं से चंद्रमा को मुक्त किया था। शेषनाग नामक स्थान पर भगवान शिव ने अपने गलें से सांपो को छोड़ दिया था। अपने पुत्र गणेश की उन्होंने महागुनस नामक पर्वत पर छोड़ दिया था। उसके बाद भगवान शिव ने पंचतरणी में जाकर पांचों तत्वों बका परित्याग किया।
10.अंत में सबकुछ छोड़कर भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा में प्रवेश किया और माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनाई थी।

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